कृष्ण अकेले ऐसे हिन्दू अवतार है की जिन्हें हिन्दुओ ने पूर्ण अवतार माना है ,उनके अन्दर भगवान होने की सभी कलाये मौजूद थी ,असल में कृष्ण जीवन के बहुत करीब है और उन्होंने जीवंन के हर रूप को खुले दिल से अपनाया है, वो रासलीला भी कर सकते हैं, वो युद्ध भी कर सकते हैं ,वो नदी में नहाती गोपिओ के वस्त्र लेकर भाग भी सकते है, और द्रौपदी की रक्षा भी कर सकते हैं,वो अपने मित्र सुदामा के लिए नंगे पैर दौड़ सकते हैं , और अपनी सखी राधा को हमेशा के लिए छोड़ भी सकते है। वो युद्ध से पहले शांतीदूत बन सकते हैं,और पूरे युद्ध को खुद निर्धारित भी कर सकते हैं,वो अर्जुन के सारथी भी बन सकते हैं ,और साथ ही दुर्योधन को अपनी सारी सेना भी दे सकते हैं ,वो गीता का ज्ञान भी दे सकते हैं , और मक्खन भी चुरा सकते हैं, वो युद्ध छोड़ कर भाग भी सकते हैं, और कर्ण द्रोणाचार्य को मारने में अनैतिकता से भी नहीं भागते,वो गोपिओ के साथ नृत्य भी कर सकते हैं और अपने मामा का वध भी कर सकते हैं,वो बांसुरी भी बजा सकते हैं और सुदर्शन भी उठा सकते हैं।
कृष्णा का महत्त्व इतना न होता अगर रासलीला नृत्य करने वाले कृष्ण और महाभारत करने वाले कृष्ण एक ही इंसान न होते। इस पूर्ण अवतार को जीना दूर की बात है साधारण इंसान इसे एक साथ पूरा समझ ही नहीं पाते। सूरदास ने सिर्फ बाल कृष्ण को समझा ,चैतन्य महाप्रभु ने सिर्फ नाचते गाते कृष्ण को , इस्कान ने कर्मयोगी कृष्णा की गीता समझी और रसखान ने सिर्फ वृन्दावन की गलिया...कोई भी एक साथ उनके सभी रूपों को नहीं समझ पाया। वो ऐसा चरित्र हैं जिसमे सभी लोग कुछ न कुछ अपने जैसा खोज सकते है कलाकार,गायक,नर्तक,प्रेमी,राजनीतिज्ञ ,यहाँ तक की चोर और हत्यारे भी कृष्ण की जीवन की किसी न किसी कडी को खुद से जोड़ सकते हैं।
कृष्ण के पूर्ण अवतार भगवान होने की घोषणा उनके द्वारा जिन्दगी के इन सारे रूपों को एक साथ निभाया जाना ही हैं।
इसी तरह जब किसी इन्सां को जरूरत के हिसाब से एक साथ एक ही जीवन में कई विपरीत रूप निभाते देखता हूँ तो लगता है की इसमें भी शायद कुछ कुछ कृष्ण का अंश ही है। यहाँ बात एक स्त्री की है जिसे मैंने देखा अपनी सखी को परेशान करने वाले शख्स को डपटते हुए, फिर अपने घर में बहुत ख़ुशी से सभी बर्तन साफ़ करते हुए,बिना किसी शिकायत खुद घर की सफाई करते हुए, सभी की ख़ुशी के लिए पती से दूर पति के माता पिता की सेवा करते हए, कभी डिस्कथेक का पता दूंदते हुए,कभी प्रेमी (शादी के पहले)से चोरी छुपे मिलते हुए,कभी फिल्म कभी आउटिंग और कभी दुसरे शहरो में दोस्तों के साथ गुपचुप घुमते हुए , शौक से साडी, सूट जीन्स सब पहने हुए,कभी होटल में जाते हुए और कभी कठिन व्रत निभाते हुए।
जितने रूप जिन्दगी के हो सकते हैं किसी से कोई शिकायत नहीं, क्या ये कृष्ण का अंश नहीं?
हैं साधारण लोग जो डिस्को जा सकते हैं पर फिर बर्तन सफाई उन्हें समझ नहीं आयेगी हैं ऐसी भी लोग जो प्रेमी को पूरा प्रेम दे सकते हैं पर उनके माता पिता की सेवा उन्हें समझ नहीं आयेगी,हैं ऐसी भी लोग जो घर को पूरी सेवा दे पर फिर डिस्को उनसे न हो पाए.. पर कोई कृष्ण ही होगा जो सब कुछ समझे और जीवन के हर पहलु को अपनाये।
हैं साधारण लोग जो डिस्को जा सकते हैं पर फिर बर्तन सफाई उन्हें समझ नहीं आयेगी हैं ऐसी भी लोग जो प्रेमी को पूरा प्रेम दे सकते हैं पर उनके माता पिता की सेवा उन्हें समझ नहीं आयेगी,हैं ऐसी भी लोग जो घर को पूरी सेवा दे पर फिर डिस्को उनसे न हो पाए.. पर कोई कृष्ण ही होगा जो सब कुछ समझे और जीवन के हर पहलु को अपनाये।
जय श्री कृष्णा।