हिंदुस्तान के हर शहर की तरह रामपुर के गंज इलाके में भी एक पंडित जी हैं जो दुख दूर करने के लिए ग्रहों के उपचार और टोटके बताते हैं।
पते की बात ये है की उनके पास सभी धर्मो के लोग आते है। जितने हिन्दू आते है उतने ही दुसरे भी।
हिन्दू धर्म में और भी बाते हैं जो दुसरे धर्म के लोग सीख सकते हैं पर वो सिर्फ उन्ही बातो में उत्सुक हैं की जो दुःख दूर करें।
कोई भी धर्म के पास भगवान,शांति या निर्वाण की तलाश में नहीं जाता, असल में सब दुखी हैं या तो दुःख से दुखी है या कुछ पाने के लिए दुखी हैं। वो बस दुःख से छुटकारा चाहते हैं ,वो 'कुछ" पाना चाहते हैं जो सिर्फ उनके अपने करने से नहीं मिलेगा,इसीलए वो उस "कुछ" को पाने की चाह में धर्म की तरफ मुड़ जाते है और उम्मीद करते है की उनसे तो नहीं होगा शायद धर्म ही उन्हें उनके सुख लाकर दे दे,शायद धर्म में वो दैविक और अद्रश्य शक्ति हो की उनका काम बन जाए....यही सच है की लोग परेशान है और बस अपना काम बनाने की उम्मीद में धर्म के चक्कर लगा रहे हैं। । ऐसे में अगर आमिर खान भी दुःख से निजाद दिला दें तो लोग आमिर खान के पीछे भी चलने लगेंगे,आमिर भी भगवान कहलाने लगेंगे।
गरीबो को न बाँट कर दूध शंकर जी को चडाना बहुत शुरुवाती मसला है , सिर्फ शंकर जी को दूध चडाने से ही अगर दुःख दूर हो जाते होते तो भी तो कोई बाबा या कोई मंदिर अरबपति न हो गया होता। बस दूध ही पर बात ख़त्म हो जाती। तब कोई रामपाल या आसाराम जी के पीछे न जाता।
समस्या ये भी है की लोग पडकर या खुद जानकर समझने को राजी नहीं है। बाबा या पंडित करते है पर कोई सही धर्म की किताब दुःख दूर करने का दावा नहीं करती। सभी धर्म यही कहते है की हुकुम रजाई चलना, बिना शिकायत।जीसस सूली पर चड़ने के बाद भी कहते है की "thy will be done".
