एसिड अटैक करने वालो अगर तुमने सही में और पूरा प्यार किया होता तो तुम उसकी हर बात , हर ढंग से प्यार करते,उसकी हाँ से भी प्यार करते ,उसकी न से भी प्यार करते, उसके किसी और को चाहने से भी प्यार करते। तुम्हारा प्यार तो तुमपर निर्भर है न की दुसरे पर,तुम करते थे ये काफी था तुम्हारे जीवन में खुशियाँ भरने के लिए।
पर चलो अगर तुम्हे पूरा प्यार नहीं था। कच्चा पक्का ही था। तुम्हारा प्यार ,अभी ऐसा न था जो सिर्फ दिए चले जाने में ही खुश रहे की जिसे ये ख्याल भी न आये की बदले में कुछ लेना भी है। तुम्हारा प्यार अगर कुछ कच्चा पक्का भी होता जो सिर्फ बदले में कुछ चाहता था तो भी तो उसके न मिलने पर तुम देवदास हो जाते। कही अपना सर्वस्त्र और अपनी जान भी दे देते उसकी याद में। खो देते खुद को ,मिटा देते अपनी हस्ती।
पर चलो तुम्हे कच्चा पक्का भी प्यार न था ,मान लेते हैं की बस अपनी सांसारिक और इगोस्टिक जरूरते पूरी करने के लिए ही कोई चाहिए था , जरूरते पूरी न हुई ,तो तुम पागल होकर गुस्से से भर गए, तो भी तो तुम बस मार ही देते , हद से हद गुस्सा भी था तो भी तो बस मार ही देते उसे।
पर तुमने उसे मारा नहीं, तुमने उसे जिन्दा रखा और रोज रोज हर पल मरने के लिए छोड़ दिया। एक बार में मरता देख तुम्हारी आग शांत न होती , होती भी कैसे ,हवस और अहम् की जरूरत जितनी बड़ी थी ,आग भी तो उतनी ही बड़ी होगी।
मैं बहुत शर्मिंदा हूँ की तुम मेरे समाज का हिस्सा हो। तुम्हे तो मारकर तुरंत खत्म कर ही देना चाहिए। पर तुम्हे जिस समाज ने जन्म दिया है वो तुम्हारे जैसे औरो को भी जन्म देता रहेगा। यही सोच कर मैं शर्मिंदा भी हूँ और डरा भी हूँ।
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