हैप्पी वेलेंटाइन टू
आल लवर्स :
बहुत समय पहले एक बहुत
ही खूबसूरत कहानी पड़ी थी एक बड़े से पेड़ और छोटे बच्चे की कहानी ! वेलेंटाइन डे पर
शेयर करने का ख़याल आया !
एक बड़ा ऊंचा और घना पेड़ था ,जिसकी लम्बी
लम्बी टहनिया थी ,जिसमे दूर दूर से चिड़िया आकर रहती थी ,सुन्दर सुन्दर
फूल पेड़ पर आते थे और मीठे फल भी ! एक
छोटा बच्चा अक्सर उस पेड़ के पास आकर खेलता
था और धीरे धीरे उस बड़े से पेड़ को उस छोटे से बच्चे से प्यार हो गया ! बड़े और छोटे के
बीच में प्यार संभव है अगर बड़े को ये जागरूकता न हो की वो बड़ा है ! पेड़ को तो अपने बड़े होने का ज्ञान था नहीं ,ऐसा ज्ञान तो
बस इंसानों में ही होता है ! लिहाजा पेड़ और बच्चे में प्यार संभव हो पाया ,फिर प्यार के
लिए कोई छोटा बड़ा होता भी नहीं !
बच्चा पेड़ की ऊंची टहनियों से खेलता था और पेड़ बच्चे के लिए अपनी ऊंची
टहनियों को झुका देता था ,जिससे वो आसानी से फूल और फलो को तोड़ सके !
प्यार हमेशा ही झुकने के लिए तैयार रहता है ! और अहम् झुकाने के लिए ! अहम् हमेशा
ही मांग पर आधारित है , वो उधर ही चलेगा जिधर मांग पूरी होगी ! प्यार
की कोई मांग नहीं ,प्यार अपना इनाम खुद ही है !
हसता खेलता बच्चा पेड़ के पास आता, पेड़ अपनी टहनियों को झुका देता , पेड़ बहुत ही खुश
होता और प्रेम से भर जाता जब बच्चा उसके फूल और फलो को तोड़ता , प्यार है ही ऐसा
जो की वो तब खुश होता है की जब कुछ दे सके ,जबकि अहम् तब
खुश होता है जब वो कुछ ले सके !बच्चा धीरे धीरे बड़ा होता गया और पेड़ बच्चे को और
प्यार देता गया , वो खुश होता जब बच्चा पेड़ की शाखों पर आराम
करता ,उसकी पत्तियों का ताज बनाकर घूमता ! पेड़ से
मिलते प्यार की वजह से बच्चा और
खुशियों के साथ बड़ा होता रहा !
पर समय गुजरता गया , बच्चे के और दोस्त भी हो गए ,अब बच्चे को अपने एग्जाम
देने होते थे ,अपने और दोस्तों से बातें करनी होती थी लिहाज़ा बच्चे ने पेड़ के पास जाना कम कर दिया , पर पेड़ इंतज़ार
करता रहता था ! प्यार दिन रात इंतज़ार करता है ,पूरे मन
से इंतज़ार करता है और पुकारता है अपने प्रेमी को ! पेड़ उदास रहता था, जब
बच्चा खेलने नहीं आता था ! प्यार उदास हो
ही जाता है जब वो बाँट न सके ,प्यार उदास होता है जब वो किसी
को कुछ दे न सके ,जबकि अहम् उदास होता है जब वो किसी से कुछ ले न सके !
समय गुजरता गया बच्चा और बड़ा होता गया और पेड़ के पास और भी कम आने लगा , जो बड़े हो जाते
है उनकी आशाएं भी बड जाती है , बड़ी आशाओं के
बीच प्यार के लिए समय कम ही रह जाता है !
एक बार पास से गुजरते समय पेड़ ने उस लड़के को रोककर कहा की मैं तुम्हारा
रोज इंतज़ार करता हूँ तुम आते नहीं !
लड़का कहता है की तुम्हारे पास क्या है ? मुझे तुम्हारे
पास क्यूं आना चाहिए ? मुझे रूपए की तलाश है ? तुम मुझे रूपए
तो दे नहीं सकते !
पेड़ ने कुछ परेशानी से कहा की क्या जब मैं कुछ दे सकूंगा तब ही तुम मेरे पास
आओगे ! ये तो प्रेम न हुआ! प्रेम तो बेहिसाब और बिना शर्त देना है , हम पेड़ तो इस
रूपए को नहीं समझते और शायद इसीलिये हमें इंसानों की तरह प्रेम और शांति की खोज के
लिए धर्म और मंदिरों में नहीं भटकना पड़ता ! नहीं हम पेड़ रुपयों को नहीं समझते !
लड़के ने कहा तो फिर मैं तुम्हारे पास क्यूं आऊं ? मुझे रूपए की
जरूरत है और मैं वहीं जाऊँगा जहाँ रूपए मिलेंगे ! पेड़ ने कुछ देर सोचा और कहा की प्रिय
तुम कहीं मत जाओ , तुम्हे रूपए की जरूरत है तो मेरे सारे फल तोड़
लो ,उन्हें बेच कर तुम्हे रूपए मिल जायेंगे !
लड़का तुरंत खुश हो गया ,और उसने उछल उछल कर सारे ही फल तोड़ लिए, जो कच्चे फल थे
वो भी तोड़ लिए गए कुछ टहनिया भी टूट गयी ! अपनी शाखाएं टूट जाने पर भी पेड़ खुश था
! प्यार हमेशा ही कुछ देकर खुश रहता है और अहम् कुछ लेकर भी खुश नही रह पाता
,उसकी मांग कभी भरती ही नहीं ! पेड़ ने तो इस
बात पर भी ध्यान नहीं दिया की लड़के ने मुड़कर उसे धन्यवाद भी नहीं किया , क्यूंकि उसका
धन्यवाद तो इस बात में ही छुपा है की उसके प्रेमी ने उसकी भेट को स्वीकार तो किया
! वो इतने में ही पूरा खुश है !
फिर लड़का बहुत बहुत समय तक वापस नहीं आया ! उसे रूपए मिल गए थे और वो मिले हुए
रूपए से और रूपए बनाने में व्यस्त था , इस व्यस्तता में
वो पेड़ को भूल ही गया ! कई बरस बीत गए और
लड़का वापस नहीं आया , पेड़ दुखी रहने लगा था ! वो दुखी मन से पुकार
और प्राथना करता था अपने प्रेमी के लौट आने के लिए !
कई बरसो बाद लड़का ,पूरा आदमी बन कर एक दिन वापस आया , उसे देखते ही
पेड़ ने कहा की आओ मुझसे लिपट जाओ !
बच्चे ने कहा की ये सब भावनात्मक बातें बंद करो , वो सब बचपन की
नादानी बातें थी , पर अब मैं बच्चा नहीं हूँ ! अहम् को
प्रेम सदा ही नादानी और पागलपन की बात ही समझता है !
फिर भी पेड़ उससे कहता है की आओ मेरे साथ खेलो ,मेरी शाखो पर
आराम करो मेरी छाँव में नाचो और गाओ !
आदमी कहता है की ये व्यर्थ की बातें बंद करो मुझे घर बनाना है , क्या तुम मुझे
घर दे सकते हो ?
पेड़ कहता है की हम पेड़ो को घर की जरूरत नहीं होती इसलिए हमारे पास घर नहीं होते ,घर की जरूरत तो
सिर्फ इंसानों को ही होती है फिर इंसानों को घरो से क्या मिला है घर जितने बड़े हुए
हैं इंसान का मन उतना ही छोटा हो गया है ! पर प्रिय तुम परेशान न हो ,तुम मेरी शाखाएं और टहनियां काट कर उनसे
घर बना सकते हों !
आदमी बिना कोइ समय व्यर्थ किये आरी लाया और पेड़ की सारी शाखाएं काट दी , पेड़ में सिर्फ
एक मोटा ताना रह गया ! फिर भी पेड़ का प्रेम अपने प्रेमी के लिए कुछ भी कर कर खुश
ही था !
आदमी ने इस बार भी कोई धन्यवाद न दिया , वो घर बना कर रहने
लगा और फिर से बरसो तक पेड़ के पास नहीं आया !
उधर पेड़ में कोई शाखें और पत्तियां नहीं बचे थे , जिससे वो कमज़ोर
होता गया , पेड़ की आत्मा अपने प्रेमी को पुकारती रही ,पर कुछ न हुआ !
समय गुजरा , आदमी अब बुडा हो गया और एक दिन पेड़ के पास
आकर खड़ा हुआ ! पेड़ ने पुछा की मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ ?तुम इतने समय के
बाद आये ?
आदमी ने कहा की तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो , मुझे तो समुन्दर
पार जाना है ,वहां से धन कमा कर लाना है ,मुझे नाव की जरूरत है !
पेड़ ये सुन बहुत ही ख़ुशी से बोला की इसमें तो कोई समस्या नहीं हैं ,प्रिय तुम मेरा
मोटा तना काट कर उसकी नाव बना सकते हो !मुझे बहुत ख़ुशी मिलेगी जो मैं तुम्हारे इस
काम में मदद कर सकूं , बस ये याद रखना की इस बार जल्दी लौट कर आना , मैं तुम्हारा
इंतज़ार करूंगा !
आदमी तुरंत एक आरी लाया और उसने पेड़ का ताना काट कर एक नाव बनाई और विदेश चला
गया , फिर लौट कर नहीं आया ! पेड़ में अब बस जड़ ही
रह गयी थी ! पेड़ इंतज़ार करता रहा पर आदमी न लौटा , अहम् सिर्फ वहीं
जाता है, की जहाँ से कुछ मिलने की उम्मीद
हो ,पेड़ के पास तो अब कुछ बचा नहीं था देने के
लिए वो तो बस एक जड़ ही था अब ! अहम् कभी ख़त्म न होने वाली मांग है और प्यार दान है , प्रेम सम्राट है
और अहम् भिखारी !
और एक दिन जब एक विदेशी राहगीर उस जड़ के पास आराम करने के लिए ठहरा तो उस जड़
बन चुके पेड़ ने उससे अपने दिल की बात कही की ....
मेरा एक प्रेमी विदेश गया था और वो अभी तक लौटा नहीं , मुझे उसकी बहुत
चिंता रहती है , कही वो सफ़र में बह तो नहीं गया होगा , कही वो विदेश
में भटक तो नहीं गया होगा , क्या विदेश में उसके साथ सब कुशल मंगल होगा
की नहीं , पता नही वो जिन्दा भी होगा या नहीं ? मुझे उसका कोई
समाचार कैसे मिले ? अब जब मेरा अंतिम समय भी आने वाला है तो ,अगर मुझे उसका
कोई समाचार मिल जाता तो दिल को कुछ सुकून मिलता और मैं चैन से मर सकता !
पर मैं अपने
प्रेमी को बुलाऊ भी तो कैसे , वो मेरे बुलाये
आएगा भी तो नहीं , मेरे पास तो अब कुछ देने के लिए हैं नहीं और
वो सिर्फ लेने की ही भाषा समझता है !