Thursday, March 5, 2015

कैंपस के कुत्ते और लड़की

परसो जब नोएडा से रात को 9 बजे ट्रेनिंग सेंटर पंहुचा तब ट्रेनिंग सेण्टर के अंदर चार कुत्ते मेरे पीछे लग गए। मैं थोडा डरा और धीरे धीरे दबे पाओं हॉस्टल की तरफ बढ़ता रहा और कुत्ते भी कुछ धीमी आवाज में भो भो करते हुए मेरे पीछे चलते रहे। हॉस्टल के गेट के पास पहुच कर कुत्तो ने मेरा साथ छोड़ दिया और मेरी भी तसल्ली हुई। फिर मैं सोचता रहा की कौन इन कुत्तो को ट्रेनिंग कैंपस में रहने देता है। यहाँ अधिकतर बाहर के लोग आते है ऐसे में कुत्तो को कैंपस के बाहर क्यूँ नहीं करते पर मैं जानता था की मेरी कंपनी को खुद की चिंता तो है नहीं तो इन कुत्तो के मसले पर फ़िक्र कौन करेगा। फिर भी ये सवाल तो था ही की इन कुत्तो को खाना कौन देता है। कौन इनके लिए दाना पानी जुगाड़ता है यहाँ। ऐसा कुछ सोचकर मैं इस मसले को भूल गया।
फिर आज सुबह मॉर्निंग वाक् पर जाते समय एक अलग नज़ारा दिखा। वास्केटबॉल ग्राउंड के बीच में चार कुत्तो में से एक कुत्ता मरा पड़ा था और तीन कुत्ते उसको घेरे एक दम शांति के साथ खड़े थे। कोई भी कुत्ता मुझे देख कर भौका नहीं। शायद आज उन्होंने मुझे देख कर भी अनदेखा कर दिया था क्यूंकि आज उनके लिए किसी अजनबी की उपस्थिति से बड़ा सवाल किसी अपने की अनुपस्थिति का था। मेरे पास भी रुकने की वजह न थी ,मैं अपनी मौज में चल रहा था की अचानक से रुकने की वजह मिल गयी। एक 15-18 साल की लड़की हाथ में कुछ खाना लेकर कुत्तो के पास आई। कुत्तो ने एकदम खामोशी से उस लड़की के लिए जगह बनायीं और लड़की बैठ कर एक हाथ में खाना लिए हुए दूसरे हाथ से उस मरे हुए कुत्ते का सिर सहलाने लगी। तीनो कुत्ते  लड़की के बगल में खड़े बड़ी गौर से लड़की के उस हाथ को देखते रहे जो मरे हुए कुत्ते का सर सहला रहा था। इस समय कुत्तो का ध्यान भी लड़की के उस हाथ की तरफ बिलकुल नहीं गया की जिसमे खाना था। या ध्यान गया भी हो तो उन्होंने उसे इस समय अपने दोस्त से कीमती नही माना। लड़की मरे कुत्ते का सिर सहलाती जा रही थी और बगल में खड़े कुत्ते बहुत उम्मीद भरे भाव से एक दम शांत ये देखे जा रहे थे। शायद कुत्तो को उम्मीद थी की जो हाथ उन्हें खाना देते आये हैं वही हाथ उनके साथी को जिंदगी भी दे पाएंगे।शायद उन्हें खाना देने वाली लड़की ही उनके लिए भगवान डॉक्टर सब कुछ थी जिससे वो अपनी सारी मांगे और सारी प्रार्थनाएं करते होंगे। और आज उनकी मांग सिर्फ खाने की नहीं थी , अपने साथी की ज़िदगी की मांग के लिए वो आये हुए खाने को नकार चुके थे।
पर लड़की तो जानती ही थी की वो न तो डॉक्टर है और न भगवान,इसलिये उसने अपने भगवान से कुछ कहने के लिए सर उठा कर कुछ देर आसमान की तरफ देखा। फिर दाए बाए कुछ परेशान नज़रो से देखने लगी। इसी देखने में एक छण के लिए लड़की की नज़रे मेरी नज़रो से मिली और मैंने नज़रे चुरा ली।मैं उससे नज़रे मिलाता भी कैसे क्यूंकि मेरी नज़रे उन कुत्तो को कैंपस से भगाने की ख्वाइश वाली थी और उस लड़की की नज़रे कुत्ते को दुसरी दुनिया से वापस इस जहाँ में लाने की उम्मीद वाली थी। मैं उस लड़की से एक बड़े मार्जिन से हार चूका था।

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