एक चिड़िया जो अपने जन्म से ही एक पिंजरे में रहती है , उसका मालिक उसे टाइम पर खाना पानी देता रहता था। चिड़िया ने घर के बाहर कुछ कभी नहीं देखा। उसके लिए उसका मालिक ही उसका भगवान् था जो उसे खाना पानी दे रहा था। चिड़िया इस बात से भी बेखबर थी की उड़ना भी कुछ होता है , चिड़िया इस बात से अनजान थी को आज़ादी भी उसका हक़ है। उसकी जानकारी और समझ में तो उसकी दुनिया पूरी थी। वो ये ही समझती थी की दुनिया इतनी ही है इस पिंजरे जैसी और जो मालिक उसे खाना पानी दे रहा है वो उसका भगवान है।
चिड़िया के दिन शांति से गुजर रहे थे।
फिर एक दिन आसमान से गुजरते कुछ चिड़ियों के झुण्ड ने उसे देख लिया। मालिक को कही आस पास न देखकर झुण्ड से कुछ चिड़िया उसके पिंजरे के चारो तरफ बैठकर पिंजरे में कैद चिड़िया को समझाने लगी को तेरी दुनिया झूठी और अधूरी है, जिसे तू संसार समझती है वो तो एक क़ैद है और जिसे तू भगवान समझती है वो शैतान है और उसने ही तो तुझे गुलाम बना रखा है। तेरा जन्म इस कैद में मरने के लिए नहीं हुआ तुझे भी असली भगवान ने पंख दिए है तुझे भी आजाद उड़ने की आज़ादी है। अभी अभी कुछ अरमान उस कैद चिड़िया के मन में जागने शुरू हुए थे की मालिक के आने की आहट हुई और जो चिड़िया आजादी की बाते कैद चिड़िया को बता रही थी वो सब उड़ गयी। फिर उस झुण्ड में से कोई कोई चिड़िया मालिक को घर न पाकर पिंजरे में कैद चिड़िया के पास आ जाती और अपने उड़ने के रोमांच के किस्से सुनाती। कभी दूर देश की सुंदरता का बयां सुनाया जाता तो कभी बाग़ के मीठे फलो की बाते पर जैसे ही मालिक की आहट होती सारी चिड़िया उड़ जाती।
इन आज़ाद चिड़ियों के पास उस कैद चिड़िया को उसके पिंजरे से छुड़ाने का कोई इंतज़ाम न था। न ही उनके पास उस कैद चिड़िया के मालिक से लड़ने झगड़ने की हिम्मत ही थी। सारे झुण्ड में कोई भी बेचारी चिड़िया की आज़ादी में कुछ भी मदद देने में कुछ नहीं नहीं कर रहा था। बस वो आते थे और चिड़िया को समझाते थे की तेरा ये कैद वाला जीवन एक नर्क है ,ये भी कोई जीना है ,हमें देखो हमसे सीखो,हम उड़ते हैं अपने परो से ,हम अपनी मर्ज़ी से कही भी आते जाते है ,अपना भोजन खुद ढूँढ़ते है और हम किसी पर निर्भर नहीं है । यही तुम्हारा भी हक़ है तुम्हे भी ऐसे ही जीना चाहिए।
पर वो कैद में बंद चिड़िया जिसके कैद से आज़ाद होने का अभी कोई इंतज़ाम नहीं है जिसे सारी ज़िन्दगी बिना उड़ान भरे ही गुजारनी है उसके लिए क्या ये ही अच्छा न था की अगर उसे आजाद न करना था तो उसके दिल में आजादी के अरमाँ जगाये ही न जाते उसे बताया ही न जाता की दूर देश की खूबसूरती क्या है...हवाओ में पंख फैलाकर आजादी से बहे चले जाना क्या है। कैद वो पहले भी थी ,पर शांत थी आज ये कैद उसके मन में गहरे सवाल पैदा करती है जिसके जवाब उसे कोई भी न देगा।जो जिंदगी पहले चिड़िया को ठीक ही लगती थी वो अब नर्क लगती है।अब वो पल पल घुटती है और उसे उसकी घुटन का कोई हल भी भी नहीं मिलता। अब उसे नफरत हो गयी है अपनी ज़िन्दगी से।
मन को परेशान करने वाला सवाल ये है की हिंदुस्तान के गाँव में, छोटे शहरो और कस्बो में रहने वाली लडकिया जब दीपिका पादुकोण का माय चॉइस वीडियो देखती होंगी तो उनके मन की हालात इस कैद में बंद चिड़िया से कितनी अलग होगी?
चिड़िया के दिन शांति से गुजर रहे थे।
फिर एक दिन आसमान से गुजरते कुछ चिड़ियों के झुण्ड ने उसे देख लिया। मालिक को कही आस पास न देखकर झुण्ड से कुछ चिड़िया उसके पिंजरे के चारो तरफ बैठकर पिंजरे में कैद चिड़िया को समझाने लगी को तेरी दुनिया झूठी और अधूरी है, जिसे तू संसार समझती है वो तो एक क़ैद है और जिसे तू भगवान समझती है वो शैतान है और उसने ही तो तुझे गुलाम बना रखा है। तेरा जन्म इस कैद में मरने के लिए नहीं हुआ तुझे भी असली भगवान ने पंख दिए है तुझे भी आजाद उड़ने की आज़ादी है। अभी अभी कुछ अरमान उस कैद चिड़िया के मन में जागने शुरू हुए थे की मालिक के आने की आहट हुई और जो चिड़िया आजादी की बाते कैद चिड़िया को बता रही थी वो सब उड़ गयी। फिर उस झुण्ड में से कोई कोई चिड़िया मालिक को घर न पाकर पिंजरे में कैद चिड़िया के पास आ जाती और अपने उड़ने के रोमांच के किस्से सुनाती। कभी दूर देश की सुंदरता का बयां सुनाया जाता तो कभी बाग़ के मीठे फलो की बाते पर जैसे ही मालिक की आहट होती सारी चिड़िया उड़ जाती।
इन आज़ाद चिड़ियों के पास उस कैद चिड़िया को उसके पिंजरे से छुड़ाने का कोई इंतज़ाम न था। न ही उनके पास उस कैद चिड़िया के मालिक से लड़ने झगड़ने की हिम्मत ही थी। सारे झुण्ड में कोई भी बेचारी चिड़िया की आज़ादी में कुछ भी मदद देने में कुछ नहीं नहीं कर रहा था। बस वो आते थे और चिड़िया को समझाते थे की तेरा ये कैद वाला जीवन एक नर्क है ,ये भी कोई जीना है ,हमें देखो हमसे सीखो,हम उड़ते हैं अपने परो से ,हम अपनी मर्ज़ी से कही भी आते जाते है ,अपना भोजन खुद ढूँढ़ते है और हम किसी पर निर्भर नहीं है । यही तुम्हारा भी हक़ है तुम्हे भी ऐसे ही जीना चाहिए।
पर वो कैद में बंद चिड़िया जिसके कैद से आज़ाद होने का अभी कोई इंतज़ाम नहीं है जिसे सारी ज़िन्दगी बिना उड़ान भरे ही गुजारनी है उसके लिए क्या ये ही अच्छा न था की अगर उसे आजाद न करना था तो उसके दिल में आजादी के अरमाँ जगाये ही न जाते उसे बताया ही न जाता की दूर देश की खूबसूरती क्या है...हवाओ में पंख फैलाकर आजादी से बहे चले जाना क्या है। कैद वो पहले भी थी ,पर शांत थी आज ये कैद उसके मन में गहरे सवाल पैदा करती है जिसके जवाब उसे कोई भी न देगा।जो जिंदगी पहले चिड़िया को ठीक ही लगती थी वो अब नर्क लगती है।अब वो पल पल घुटती है और उसे उसकी घुटन का कोई हल भी भी नहीं मिलता। अब उसे नफरत हो गयी है अपनी ज़िन्दगी से।
मन को परेशान करने वाला सवाल ये है की हिंदुस्तान के गाँव में, छोटे शहरो और कस्बो में रहने वाली लडकिया जब दीपिका पादुकोण का माय चॉइस वीडियो देखती होंगी तो उनके मन की हालात इस कैद में बंद चिड़िया से कितनी अलग होगी?
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