Thursday, April 23, 2015

नेता जी हाय हाय ..

जय- यार केजरीवाल की सभा में एक इंसान ने आत्महत्या कर ली।
विजय- अच्छा, जरूर कॉन्ट्रैक्ट लेबर होगा। नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हो रहा होगा। केजरीवाल ने पक्का करने का वादा पूरा नहीं किया। .....केजरीवाल हाय-हाय। केजरीवाल हाय -हाय।
जय- नहीं भाई।मैंने खबर सुनी है की वो तो किसान था।
विजय- अच्छा , तब भूमी अधिग्रहण हो रही होगी उसकी इसलिए आत्म हत्या की होगी। मोदी जी ने किसान विरोधी कानून बनाया है। ...मोदी हाय हाय....बी जे पी हाय हाय ।
जय- अरे नहीं। कोई बता रहा था की वो तो फसल बर्बाद होने की वजह से परेशान था। फसल पर ओले पड़ गए।
विजय- हां हां ...ये ही बात होगी, इस बार बड़ी फसल बर्बाद हुई है और किसानो को मुवावजा नहीं दिया जा रहा।
जय- पर इस बार तूने किसी की हाय हाय नहीं की।
विजय- अरे पहले ये तो जान लूं की किस राज्य का था। मुआवजा तो किसी राज्य ने नहीं दिया। एक आदमी के लिए सबकी हाय हाय की मेहनत क्य्यों करना ?
जय- चाचा बता रहे थे की राजस्थान का था।
विजय- बी जे पी हाय हाय....वसुंधरा राजे हाय हाय....
जय- यु पी का भी हो सकता है शायद !
विजय - नेता जी हाय हाय ..समाजवादी पार्टी हाय हाय हाय ...
जय - अरे तू बस मौका देख कर हाय हाय ही करेगा या कुछ और भी ...
विजय - भाई इस देश में सेक्युलर होने का मतलब ...बस गैर सेक्युलर की खिलाफत है ...पक्के हिन्दू होने का मतलब मुस्लमान की खिलाफत है .... महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी है तो किसी महिला के मुजरिम को ढूँढो और उसकी की हाय हाय कर दो बस .... बच्चो के प्रति प्रेम दिखना है तो बच्चो को मजदूर बनाने वाले को दूंदो और चिल्लाओ हाय हाय ..... किसानो के लिए प्रेम दिखाना है तो मौका ढूँढो कहाँ कोई किसान परेशान है और चिल्लाओ हाय हाय ..... हाय हाय .............इस मुल्क में .किसी की मदद करके नहीं बस हाय हाय हाय हाय चिल्लाकर ही संवेदनशीलता दर्शायी जाती है .............. सब यही कर रहे है तो तब मैं संवेदनाहीन कैसे रहूँ ..मुझे भी दर्द हुआ है ...नेता जी हाय हाय ....हाय हाय ..

Tuesday, April 14, 2015

ज्योतिषाचार्य पंडित जी का ऑफिस

ज्योतिषाचार्य पंडित जी का ऑफिस :
एक महिला पंडित जी से ..पंडित जी मेरा बेटा कोटा में आई आई टी की कोचिंग कर रहा है ..इस बार दूसरा एटेम्पट है ..उसकी अच्छी रैंक आएगी न ! ये मैं कुडली लायी हूँ इसे देख कर बताओ !
पंडित जी : हाँ दिखाओ ...
फिर पंडित जी अपने लैपटॉप में डिटेल भरते हैं ! और 5 मिनट देखने के बाद :
पंडित जी : देखो जैसी इसकी गृह दशा है इसको पास हो जाना चाहिए !
महिला : पंडित जी पास तो हो ही जाएगा ..ये बताओ की रैंक कितनी आएगी ? कुंडली सही से देख कर बताओ ?
पंडित जी : देखो मैंने कहा न की अभी जैसी इसकी गृह दशा है , इसके पास होने की ही फ़िक्र करो ..पास हो जाएगा ..वो ही काफी है !
महिला : क्या पंडित जी ..रैंक बताओ न ..अच्छी रैंक नहीं आ रही है क्या ?
पंडित जी फिर 5 मिनट अपने लैपटॉप में झांकते हैं !
पंडित जी : देखो इससे पूछो की ये इन्टरनेट कितनी देर करता है ?
महिला : क्यूं पंडित जी ..ज्यादा नेट करता है क्या ?
पंडित जी : इसके मंगल की दशा सही नहीं है ..इसका मन भटकता है ..भटकाव है इसके मन में !
महिला : तो क्या पंडित जी इस बार अच्छी रैंक नहीं आयेगी ?
पंडित जी : अब मैं ज्यादा क्या कहू ? आपको इनडाइरेक्ट वे में बता ही दिया ..इससे पूछो की इन्टरनेट कितनी देर करता है ? जब पदाई में ध्यान नहीं लगेगा तो रैंक कैसे आ पायेगी ..आप अभी पास होने की फ़िक्र ही करो ,वो ही काफी है !
महिला : मैं आपकी फ़ोन पर बात कराऊ ? आप पूछ लेना ..
पंडित जी : नहीं उसे मेरे सामने लाओ ..फ़ोन पर बात नहीं हो पाती है ..मैं कहूँगा की तू नेट करता है वो कह देगा की नही करता ..
महिला : सही कह रहे हो पंडित जी ...हमसे कहता रहता ही की पड़ रहा हूँ और इन्टरनेट करता रहता है ..अब हम क्या कर सकते हैं !
पंडित जी : हाँ यही बात है उसे मेरे सामने लाओ ...तब सच सामने आएगा !
महिला : पंडित जी फिर कोई उपाय बताओ ..अच्छी रैंक कैसे आये ...लड़का भटक क्यूं रहा है ?
पंडित जी फिर 5 मिनट लैपटॉप में झांकते है ..
पंडित जी : मुझे तो तुम्हारे घर में किसी स्त्री का साया दिख रहा है ..किसी स्त्री का बुरा प्रभाव आ रहा है ..
महिला : क्या मतलब पंडित जी!
पंडित जी : अब इतना तो इन इनडाइरेक्ट कह रहा हूँ ..लड़के के मन को भटकाने से बचाने के लिए राहू के उपचार की जरूरत है ..राहू लड़के के मन को कहीं और ले जा रहा है ..मैं उपचार लिख देता हूँ ..
फिर 5 मिनट पंडित जी कागज़ पर 4-5 टोटके लिख देते हैं
महिला : पंडित जी ये सारे उपचार करने हैं की कोई 1 कर लें !
पंडित जी : अरे डॉक्टर भी तो एक मर्ज की चार गोली लिखता है एक सुबह एक दोपहर एक शाम एक रात ..ऐसे ही राहू के उपचार भी कई एक साथ होते हैं ..सारे उपचार राहू से सम्बंधित ही हैं ..अब जो भी गृह को पसंद आ जाये और गृह शांत हो जाए ..इसलिए सारे उपचार एक साथ करने पड़ते हैं ..
महिला : पंडित जी इसके बाद भटकाव बंद तो हो जाएगा ..इसके बाद स्त्री का साया तो नहीं रहेगा ..
पंडित जी : अरे जब आप डॉक्टर के पास जाते हो तो क्या कोई डॉक्टर गारंटी लेता है की मरीज ठीक हो ही जायेगा ..मुझे तो आज तक कोई ऐसा डॉक्टर मिला नहीं ..फिर आपको पक्का इलाज चाहिए तो एक अंगूठी बनवा देता हूँ ..वो पहनवा दो ..वो हमेशा का इलाज हो जाएगा ..एक पुखराज या हीरे की अंगूठी पहनवा दो ....क्य्योंकी राहू की दशा तो 2025 तक चलेगी !
महिला : अच्छा जी पंडित जी ..कौन से अंगूठी ...
पंडित जी : मैं तुम्हारे भले की बात कहता हूँ ..हीरे के रूपए खर्चा क्यूं करना जब पुखराज से काम चल ही जायेगा ,पुखराज की अंगूठी बनवा लो ..
महिला :जी पंडित जी ..जब वो यहाँ आएगा तो मैं उसे आपके पास लाऊंगी ..और ये जो पर्चे पर आपने उपचार लिखे हैं ये करती हूँ पहले ...पर उसका एग्जाम तो हो चुका है ..अब उसकी रैंक कैसे आयेगी ?
पंडित जी : पहले राहू का उपचार करो फिर रैंक भी आ जायेगी, लाभ न हो फिर बताना !
देश के दुर्भाग्य से कहानी की महिला अद्ध्यापिका हैं .......... कहानी पंडित जी के सम्मान में कही गयी जो कुंडली मिला कर बता देते हैं की ये विवाह अच्छा है और वो नहीं !

Monday, April 6, 2015

my choice... my choice...

एक चिड़िया जो अपने जन्म से ही एक पिंजरे में रहती है , उसका मालिक उसे टाइम पर खाना पानी देता रहता था। चिड़िया ने घर के बाहर कुछ कभी नहीं देखा। उसके लिए उसका मालिक ही उसका भगवान् था जो उसे खाना पानी दे रहा था। चिड़िया इस बात से भी बेखबर थी की उड़ना भी कुछ होता है , चिड़िया इस बात से अनजान थी को आज़ादी भी उसका हक़ है। उसकी जानकारी और समझ में तो उसकी दुनिया पूरी थी। वो ये ही समझती थी की दुनिया इतनी ही है इस पिंजरे जैसी और जो मालिक उसे खाना पानी दे रहा है वो उसका भगवान है।
चिड़िया के दिन शांति से गुजर रहे थे।
फिर एक दिन आसमान से गुजरते कुछ चिड़ियों के झुण्ड ने उसे देख लिया। मालिक को कही आस पास न देखकर झुण्ड से कुछ चिड़िया उसके पिंजरे के चारो तरफ बैठकर पिंजरे में कैद चिड़िया को समझाने लगी को तेरी दुनिया झूठी और अधूरी है, जिसे तू संसार समझती है वो तो एक क़ैद है और जिसे तू भगवान समझती है वो शैतान है और उसने ही तो तुझे गुलाम बना रखा है। तेरा जन्म इस कैद में मरने के लिए नहीं हुआ तुझे भी असली भगवान ने पंख दिए है तुझे भी आजाद उड़ने की आज़ादी है। अभी अभी कुछ अरमान उस कैद चिड़िया के मन में जागने शुरू हुए थे की मालिक के आने की आहट हुई और जो चिड़िया आजादी की बाते कैद चिड़िया को बता रही थी वो सब उड़ गयी। फिर उस झुण्ड में से कोई कोई चिड़िया मालिक को घर न पाकर पिंजरे में कैद चिड़िया के पास आ जाती और अपने उड़ने के रोमांच के किस्से सुनाती। कभी दूर देश की सुंदरता का बयां सुनाया जाता तो कभी बाग़ के मीठे फलो की बाते पर जैसे ही मालिक की आहट होती सारी चिड़िया उड़ जाती।

इन आज़ाद चिड़ियों के पास उस कैद चिड़िया को उसके पिंजरे से छुड़ाने का कोई इंतज़ाम न था। न ही उनके पास उस कैद चिड़िया के मालिक से लड़ने झगड़ने की हिम्मत ही थी। सारे झुण्ड में कोई भी बेचारी चिड़िया की आज़ादी में कुछ भी मदद देने में कुछ नहीं नहीं कर रहा था। बस वो आते थे और चिड़िया को समझाते थे की तेरा ये कैद वाला जीवन एक नर्क है ,ये भी कोई जीना है ,हमें देखो हमसे सीखो,हम उड़ते हैं अपने परो से ,हम अपनी मर्ज़ी से कही भी आते जाते है ,अपना भोजन खुद ढूँढ़ते है और हम किसी पर निर्भर नहीं है । यही तुम्हारा भी हक़ है तुम्हे भी ऐसे ही जीना चाहिए।


पर वो कैद में बंद चिड़िया जिसके कैद से आज़ाद होने का अभी कोई इंतज़ाम नहीं है जिसे सारी ज़िन्दगी बिना उड़ान भरे ही गुजारनी है उसके लिए क्या ये ही अच्छा न था की अगर उसे आजाद न करना था तो उसके दिल में आजादी के अरमाँ जगाये ही न जाते उसे बताया ही न जाता की दूर देश की खूबसूरती क्या है...हवाओ में पंख फैलाकर आजादी से बहे चले जाना क्या है। कैद वो पहले भी थी ,पर शांत थी आज ये कैद उसके मन में गहरे सवाल पैदा करती है जिसके जवाब उसे कोई भी न देगा।जो जिंदगी पहले चिड़िया को ठीक ही लगती थी वो अब नर्क लगती है।अब वो पल पल घुटती है और उसे उसकी घुटन का कोई हल भी भी नहीं मिलता। अब उसे नफरत हो गयी है अपनी ज़िन्दगी से।




मन को परेशान करने वाला सवाल ये है की हिंदुस्तान के गाँव में, छोटे शहरो और कस्बो में रहने वाली लडकिया जब दीपिका पादुकोण का माय चॉइस वीडियो देखती होंगी तो उनके मन की हालात इस कैद में बंद चिड़िया से कितनी अलग होगी?