घर के पास एक मेडिकल की दुकान है जिसे ३०-३५ साल का एक इंसान चलता है ! क्यूंकि दुकान इंडस्ट्रियल एरिया में है जहाँ बहुत सारे मजदूर काम करते हैं तो लिहाज़ा ये मजदूर ही मेडिकल की दूकान के सबसे बड़े खरीददार हैं | मैं भी कभी कभी उस दूकान पर एक दो आम दवाइयां लेने चला जाता हूँ | और हर बार ही दूकान पर दुःख में भरने वाला नज़ारा मिलता है | दूकान पर भीड़ रहती है क्यूंकि मजदूर लोगो को अच्छे दिनों में भी इतनी तनख्वाह नहीं मिलती की वो डॉक्टर को दिखा कर दावा ले सके , डॉक्टर सब समाज सेवक है और कोई २०० -३०० से कम का परचा नहीं बनाता ,फिर वो जो दावा लिखता है वो इनती महंगी होती है की मजदूर की ४ -५ दिन की कमाई एक बुखार में ही चली जायेगी | इसलिए गरीब मजदूर मेडिकल पर दुःख बता कर ही दवा ले लेता है ! मेडिकल की दुकान पर कुछ ऐसा नज़ारा ओता है !
पहला ग्राहक - कितने रूपए की दावा हुई मेरी ?
मेडिकल वाला - ५० रूपए की ..
पहला ग्राहक - तो ३० रूपए की कर दो ..एक दो दिन कम कर दो ...
मेडिकल वाला - तो पूरी नहीं होगी ...सही नहीं होगे ..
पहला ग्राहक - तो फिर दो दिन बाद और ले जाऊंगा . अभी तीस की ही दे दो ..
पहला ग्राहक - कितने रूपए की दावा हुई मेरी ?
मेडिकल वाला - ५० रूपए की ..
पहला ग्राहक - तो ३० रूपए की कर दो ..एक दो दिन कम कर दो ...
मेडिकल वाला - तो पूरी नहीं होगी ...सही नहीं होगे ..
पहला ग्राहक - तो फिर दो दिन बाद और ले जाऊंगा . अभी तीस की ही दे दो ..
दूसरा ग्राहक - चार दिन से बुखार है ..बिलकुल उठा नहीं जा रहा ..बहुत कमज़ोरी है ..
मेडिकल वाला - चार दिन की दावा दे देता हूँ ..सही हो जाओगे ..
दूसरा ग्राहक - सही है दे दो अपने हिसाब से .
मेडिकल वाला - १०० रूपए बनेंगे |
दूसरा ग्राहक - कम नहीं हो सकता क्या ?
मेडिकल वाला - नहीं ..,ऐसा करो तुम इंजेक्शन लगवा लो ,वो सही रहेगा | ३० रूपए का है ..एक कल लगवा लेना |
दूसरा ग्राहक - हाँ लगा दो ...
मेडिकल वाला- तो अन्दर आ जाओ ..मैं इंजेक्शन लगा देता हूँ |
मेडिकल वाला - चार दिन की दावा दे देता हूँ ..सही हो जाओगे ..
दूसरा ग्राहक - सही है दे दो अपने हिसाब से .
मेडिकल वाला - १०० रूपए बनेंगे |
दूसरा ग्राहक - कम नहीं हो सकता क्या ?
मेडिकल वाला - नहीं ..,ऐसा करो तुम इंजेक्शन लगवा लो ,वो सही रहेगा | ३० रूपए का है ..एक कल लगवा लेना |
दूसरा ग्राहक - हाँ लगा दो ...
मेडिकल वाला- तो अन्दर आ जाओ ..मैं इंजेक्शन लगा देता हूँ |
तीसरा ग्राहक : इन्हें देखना ये मेरी वाइफ हैं ..इन्हें पीठ में कुछ दाने से हो गए हैं ..कई दिनों से खुजली है ?
मेडिकल वाला - इन्हें अन्दर भेजो ...
मेडिकल वाला - इन्हें अन्दर भेजो ...
मेडिकल वाला परदे के पीछे चेक करता है और कुछ दवाइया और क्रीम देता हैं | फिर १५० रूपए मांगता है
ग्राहक - क्रीम काफी नहीं है ..ये गोली किसलिए ? ऐसा करो बस क्रीम ही दे दो |
ग्राहक - क्रीम काफी नहीं है ..ये गोली किसलिए ? ऐसा करो बस क्रीम ही दे दो |
ऐसे ही कितने हिन्दुस्तानी रोजाना इस मेडिकल से दावा लेते हैं | एक दिन वहां मैंने एक गर्भवती महिला को भी देखा , पूछने पर पता चला की वो ७ महीने के गर्भ से है और मेडिकल वाले से नियमित इलाज कराती है |
फिर सोचा की ये सब बिना अच्छे दिनों में होता तो कोई बात नहीं पर अच्छे दिनों में इन मजदूरों की ज़िन्दगी में क्या फर्क पड़ा ? क्या अच्छे दिनों का मतलब ये नहीं था की मजदूरों की तनख्वाह बढेगी ? क्या अच्छे दिनों का मतलब ये नहीं था की मजदूरों गरीबो के लिए और नए सरकारी अस्पताल बनेगे ? क्या अच्छे दिनों का मतलब ये नहीं था की गरीब की थाली में अब और खाना आएगा ..महंगाई कम हो जायेगी ? क्या अच्छे दिनों का मतलब ये नहीं था की जरूरी दवाईया सस्ती मिलेंगी ? क्या अच्छे दिनों के मतलब ये नहीं था की आम इंसान को जो रोज मर्रा की जिन्दगी में सरकारी आफिसो में भ्रस्टाचार झेलना पड़ता है उसे कम करने के लिए बड़े कदम उठाये जायेंगे ( जो कदम उठते नहीं दिखे ),क्या अच्छे दिनों का ये मतलब नहीं था की मजदूरों को गरीबो नए रोजगार मिलेंगे , क्या अच्छे दिनों का ये मतलब नहीं था की कॉन्ट्रैक्ट लेबर के नाम पर होने वाले शोषण को छोड़कर क्लास सी और डी की स्थायी नौकरिया निकाली जायेंगी ? आखिर क्या था अच्छे दिनों का मतलब ? अच्छे दिनों में किसान की फसल के एम् एस पी ( मिनिमम सपोर्ट प्राइस ) कितने बदाये गए ? इस साल सिर्फ ५ परसेंट तक दाम बड़े और पिछले साल इससे भी कम | दो साल में १० % , और ये १० % भी आउटपुट पर मिलने वाली रकम का बदना है ..इनपुट का खर्चा कही ज्यादा बढता है तो कमाई १० % से भी कम बड़ी होगी दो सालो में शायद ७-८ %! जबकि सरकारी कर्मचारियों का डी ए ही ६ महीने में १० % बड़ा दिया जाता है ..बेसिक अलग ३ % बदती है | एम् एन सी में कार्यरत भारतीयों का अगर कम्पनी द्वारा डीए न बढाया जाए और दो साल में सिर्फ ५-५ % से भी कम हाइक हो, मेडिकल फैसिलिटी ,एजुकेशन फैसिलिटी, अच्छी ग्रोथ कुछ अलग से न मिले तो वो भी कम्पनी बदल देते हैं ....... बिहार में जनता ने भी नेता बदल दिए ..१.५ साल पहले जो सब बीजे पी के साथ थे ,उनमे से बहुत से उनके साथ नहीं रहे ! मुझे १.५ साल पहले बी जे पी के जीतने की जितना ख़ुशी थी उसका १% भी गम आज उसके हारने से नहीं है !
No comments:
Post a Comment