Wednesday, July 22, 2015

व्यापम कल्चर है।

मध्य प्रदेश में कही किसी ट्रेन के स्लीपर कोच में।
अजय-यार कही कोई सरकारी नौकरी का जुगाड़ बता दे । दो लाख रूपए तक तो खर्च कर सकता हूँ।
विजय-अरे भाई मुझे पता होता तो मैंने खुद की नौकरी न लगवा ली होती 2 लाख देके। भाई तू दो लाख कह रहा है यहाँ तो दस दस लाख देने को लोग तैयार है सिपाही की नौकरी के लिए।
अजय- यार तेरे मामा भी तो पुलिस में है उनके थ्रू कोई जुगाड़ निकाल।
विजय- यार मामा जी ने अपने लड़के का कराया तो है सरकारी अस्पताल में बाबू के लिए।
अजय-मोटा पैसा लगा होगा।
विजय-राम जाने, खुद से तो यही कहते हैं की कोई पैसा नही लगा पर सुना यही है की 12 लाख तक रुपया चला है।
अजय-क्या यार गरीब के लिए क्या है। एम् ए करके सिर्फ सिपाही की नौकरी मिलके भी खुश हैं ...कही से जुगाड़ कर दो लाख रूपए देने को तैयार भी है और तू कहता है की 10 लाख चल रहे हैं। अरे मेरे बाप के पास 10 लाख होते तो मैं एम् ए क्यूँ करता किसी प्राइवेट कॉलेज में मैं भी बी टेक कर लेता।
विजय- ये तो है। पर यार जब नौकरी देने वाले ने रूपए देकर ही नौकरी देनी है और लोग 10 लाख खुद ही बिना मांगे देने को तैयार है तो कोई 10 लाख छोड़कर तेरे 2 लाख क्यूँ लेगा?
अजय-वो देख टी टी आ रहा है।
विजय-आने दे ।
टी टी- टिकट दिखाइए।
विजय-पुलिस स्टाफ हैं।
टी टी- आई डी दिखाओ।
विजय- (आस्तीन ऊपर करते हुए) आई डी नहीं है ,फोन पे बात कर लो।
विजय-हैलो मामा जी ...जरा बात करना ये टिकट मांग रहे हैं।
(टी टी ने फ़ोन पर कुछ बात की और आगे चला गया)
अजय-यार ये व्यापम घोटाला क्या है?
विजय-कोई घोटाला नहीं है।
अजय-मतलब।
विजय-अरे व्यापम घोटाला नहीं कल्चर है। व्यापम हिंदुस्तान का कल्चर है। वो कल्चर जहाँ छोटी बड़ी हर नौकरी के लिए रूपए लिए जाते हैं वो कल्चर जहाँ ईमानदार बस वही है की जिसे बेईमानी का मौका नहीं मिला। वो कल्चर जहाँ रूपए देने वाले खुद आगे बढ़कर रूपए खिलाते है ,वो कल्चर जहाँ जिसकी जितनी मांगने की औकात है वो उतना मांग ही रहा है। वो कल्चर जहाँ चपरासी भी फ़ाइल को एक टेबल से उठा दुसरी टेबल पर रखने के लिए रूपए मांगता है और बड़े हक़ के साथ माँगता है ।जैसे रूपए खाना उसका हक़ हो। व्यापम घोटाला नहीं हमारा कल्चर है। फर्क बस ये है की व्यापम में सेंट्रली रिक्रूटमेंट थी तो सारा करप्शन एक नाम के नीचे आ गया और व्यापम बड़ा नाम हो गया।
अजय-इतनी मौत क्यों हो रही है कौन करा रहा है?
विजय-कौन करा रहा है तो पता नहीं पर बचपन में सुना था की एक झूठ बोलने पर उसे छुपाने के लिए 100 झूठ बोलने पड़ते है। शायद इसी तरह एक मर्डर करने पर भी 100 मर्डर करने पड़ते हैं। अभी कितने हो गए......?
अजय- अच्छा जो हमने टी टी को मामा से फोन कराके भगा दिया। क्या ये भी व्यापम कल्चर है।
विजय-...
....
...
...
.हाँ शायद.. :)  :) 

No comments:

Post a Comment