Thursday, January 8, 2015

नयी उम्मीदों का बोलने वाला राजा ....

एक जंगल में शेरो का बहुत बड़ा झुण्ड था | शेरो का एक राजा था औरकई सेनापती ,मंत्री , खजांची भी थे ! सेनापती के साथ शेर अलग अलग टुकड़ियों में शिकार करने जाते और सारा शिकार जो जमा होता उसे सारे शेरो के परिवारों में व्यवस्था के अनुसार बांटा जाता था | परा राजा एक दम मौन था उसका किसी व्यवस्था पर कोई भी नियंत्रण नहीं था ! सारे आम शेर उसकी व्यवस्था में परेशान थे , सेनापति शेरो से ८ घंटे की बजाये १२ घंटे काम कराते थे ! सेनापति शिकार करने शेरो के ही भेजते थे और शेरो के फंस जाने पर कोई मदद भी नहीं होती थी , जहाँ ३ शेरो को भेजा जाना चाहिए वहां अकेले शेर को भी भेज दिया जाता था ! खजांची जो शिकार का बटवारा करते थे वो ज्यादा हिस्सा खुद के लिए और राजा के हिस्से में रख देते थे , शेरो को उनके अधिकार से आधा ही मिलता था ..कईं राते शेरो के घरवालो को आधे पेट ही गुजारनी पड़ती थीं ! इसके बाद भी सेनापति ,मंत्री, खजांची कोई भी शेरो की किसी भी जायज मांग को नहीं सुनते थे ! और राजा मौन था !
ऐसी ही कठिनाई में सबका जीवन गुजर रहा था की चुनाव आये ! एक नए उमीदवार ने सभी शेरो में उम्मीद जगाई अच्छे दिनों की ..ये उमीदवार पुराने राजा की तरह मौन नहीं था ! ये बोलता था और हर समस्या का हल सुनाता था ! नयी उमीदो के बीच सभी शेरो ने नए उमीदवार को भरी मतों से राजा बनाया ! इतने भारी मतों से जीतने के बाद सारे जंगल को लगा की अब अच्छे दिन आयेंगे ! पर व्यवस्था वैसी ही रही ..बस मौन राजा के स्थान पर एक बोलने वाला राजा था ..पर सेनापति आज भी शेरो से ८ के बजाए १२ घंटे काम कराते हैं ! मंत्री आज भी उनकी बहादुरी का इनाम सेनापतियो को दे देते हैं ! खाजाची आज भी उनके हिस्से का शिकार राजा को या खुद को देते हैं !.
इसके बाद धीरे धीरे जंगल में नये राजा के खिलाफ भी आवाज उठाना शुरू हुई ! गुपचुप दो चार शेर महफ़िल में ,नुक्कड़ो पर नए राजा के खिलाफ भी बातें करने लगे ! पर नए राजा के पूर्ण समर्थक और वो शेर जो नए राजा पर आँख बंद भरोसा करते हैं वो कहने लगे हैं की देखो राजा जी क्या कहते हैं राजा जी सही ही कहते हैं ..नए राजा जी ने सरकार बनते ही कह दिया था की व्यवस्था सरकार से नहीं बदलेगी शेरो को ही व्यवस्था बदलने के लिए आवाज उठानी ही होगी ! शेरो को पहले खुद उस सेनापति का विरोध करना होगा जो नाजायज काम करता है , शेरो को खुद उठकर कहना होगा की हम ८ घंटे के बाद काम नहीं करेंगे ! शेरो को खुद आवाज उठानी होगी की वो मंत्रिओं की ज्यादती बर्दाश्त नहीं करेंगे ! देखो राजा जी मन की बात कह रहे हैं ..बार बार कह रहे हैं ..नए नए तरीके से कह रहे हैं की आप खुद आवाज उठाओ ..खुद मांग करो ..अकेले सरकार और राजा कुछ नहीं कर पायेंगे !
पर शेरो को खुद ही करना होता तो क्या वो मौन राजा के समय भी कर सकते थे?, या नया राजा अपनी बातो से शेरो को जगा पायेगा और समझा पायेगा की व्यवस्था वो बदले ,व्यवश्था सरकार से नहीं बदलेगी ? या शेर नए राजा से भी पुराने मौन राजा की तरह नाउम्मीद हो जायेंगे और विरोध बढता रहेगा ..ये सब समय बतायेगा ..देखिये आगे क्या होता है !

No comments:

Post a Comment