Monday, September 22, 2014

क्यूं भाई औरत का जॉब करना जरूरी है क्या?

मित्र प्रेम की एक आदत है की जब भी उसे कोई ऐसी महिला मित्र मिलती है जो अभी घर में गृहणी की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही हो ,उससे हमेशा ही कोई जॉब करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसा ही वार्तालाप एक ऐसी महिला से चल रहा है जिसकी शादी को अभी 3.5 बरस हुए है और उनका अभी 2 साल का बेटा भी है । कई दिनों की गुजारिश के बाद भी प्रेम उस महिला को जॉब के लिए फॉर्म भरने को तय्यार नहीं कर पाया । कईं दिनों टालने और घुमा फिरा कर गोल मोल जवाब देने के बाद आज महिला ने साफ़ साफ़ सवाल पुछा है की क्यूं भाई औरत का जॉब करना जरूरी है क्या? क्या घर का काम काम नहीं लगता तुम्हे?

इस सवाल के जवाब में प्रेम का उत्तर-
नहीं एक महिला का जॉब करना बिलकुल जरूरी नहीं है,घर का काम भी तो बड़ा और जरूरी काम है। पर मेरे कहने की वजह दूसरी है। आपको गलत न लगे तो ही कहूँगा। बुरा लगे तो इग्नोर कर देना।
महिला -ठीक है ..कहो

प्रेम-समय गुजरता जाएगा ,समय की गती बहुत तेज है, रोज आपके पति काम पर बाहर जाते रहेंगे,दुनिया भर के अनुभव करेंगे और हर महीने कमा कर लाते रहेंगे ,आपकी गुजर बसर कराएंगे ही..आप उनके बेटे और उनका खयाल रखना..5 साल..10 साल...15 साल... 20 साल...सिर्फ सेवा, पति की सेवा और पति के बच्चो की सेवा... फिर एक दिन अचानक आपके मन में ये सवाल आयेगा की आपका जीवन तो व्यर्थ मे ही गुजर गया...किस तरह आपको एक.. सिर्फ एक जीवन मिला और वो किसी मर्द और उसके बच्चो की सेवा मे ही गुजर गया..कोई भी आपकी पहचान ना बनी..बस दुनिया मे आये और "मिसेज ........" बनकर चले गये...भगवान के दूत जब आपकी जिंदगी का हिसाब लिखेंगे की इसने दुनिया मे क्या किया ,इसकी दुनिया मे क्या अचीवमेंट है तो सिर्फ दो बाते लिखी जाएंगी एक इसने पति की सेवा की और दूसरा की अपने बच्चो को सेवा करके अच्छे से बड़ा किया...बस।

और जब आप 60 की होगी और आपका बेटा आपको छोड़ के अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहेगा.. जो की होगा ही..हमारी जनरेशन ही अपने माता पिता की नही सुनती तो अगली जेनरेशन क्या सुनेगी...आपका बेटा आपको छोड़ कर अमेरिका चला जायेगा तो खुद ही ये अहसास करोगी की अपनी तो लाइफ ही ऐसे ही चली गयी...जीवन बस बच्चो को दे दिया और वो भी साथ ना रहे...

इसलिये कहता हू की जब आप 70 की हो और मैं 70 का हो आपसे मिलने आऊँ तो प्लीज़ ये ना कहना की आप सही कहते थे..मेरा जीवन बस पति और उनके बच्चे की सेवा में ही गया...
अपना कुछ करती तो अपने फैसले लेती..अपना एंजाय करती...कही घूमती, कही निकल जाती.. सारी दुनिया की अच्छाईयाँ और बुराइयां देखती, मेरे पास भी सारे जहान का अनुभव होता..मेरे पास भी दुनिया की समझ और कला होती.....मेरा तो ऐसा ही जीवन है भगवान...भगवान मुझे माफ रखना..जो आपने मेरे भाग्य मे दिया वो ही मैने ईमानदारी से किया..उससे ज्यादा नही कर पायी दुनिया मे कुछ  , पर भगवान तुम मेरी सही दशा और मेहनत समझना. भगवान तुम तो मुझे समझते ही होगे ना...।

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