Thursday, August 7, 2014

सन २०५० : सरकार नाबालिग की उम्र १२ से घटाकर १० करने पर विचार कर सकती है

सन २०५० : सरकार नाबालिग की उम्र १२ से घटाकर १० करने पर विचार कर सकती है !
कहाँ तक जायेंगे ? जिसके पास सही और गलत को अलग अलग करने की समझ नहीं आई हो उसके पास गलत करने और सीखने के हजारो उदाहरण पैदा करके उसे गलत करने की सजा नहीं दी जा सकती ... समाज अपनी गलतियो की सजा किसी अपराधी को देकर अपना दामन साफ़ रखना चाहता है ! बालिग में अपराधी मिल जाता है तो समाज को आसानी है पर नाबालिग बच जाता है तो इसलिए नाबालिग को भी उम्र कम कर बालिग घोषित करने की तय्यारी है !
समाज बच्चो को सजा देने के लिए बेक़रार है पर ये ध्यान नहीं देता की हम बच्चो को सिखा क्या रहे है और उन्हें क्या क्या सीखने के मौके दे रहे हैं ? हम खुद कैसा समाज बना रहे है ?
आज देश के सबसे बड़े स्तर से भी तो क्या सीखने को मिल रहा है ? जैसे अगर इतने बड़े जन समर्थन से बनी सरकार अपने बुजुगो को दरकिनार करे , अपने विरोधी राज्यपाल को बिना कारण बर्खाश्त करे ,नैतिक लोकतंत्र के लिए जरूरी "नेता विरोधी दल " को न बनने दे तो इससे कोई भी सीख सकता है की "अपने विरोधी को जड़ से ख़त्म कर देना चाहिए"... इस कथन को बड़े अपने हिसाब से समझ सकते है और बच्चे अपने हिसाब से समझेंगे ही ! पर ये सिर्फ एक स्तर की बात नहीं है ..आज समाज के छोटे बड़े हर स्तर पर अनैतिकता सीखने के मौके अधिक और नैतिकता सीखने के मौके कम हो रहे हैं ..जिसके परिणाम में समाज खुद की अनैतिकता को स्वीकार नैतिकता की तरफ वापस कदम बढाने के स्थान पर नाबालिग को भी बालिग़ घोषित करना चाहता है ! जबकी सच्चाई ये है की हमारी व्यव्श्था में बहुत बड़ा वर्ग किसी भी उम्र में कभी बालिग हो ही नहीं पता. इतनी बुद्धि भी पैदा नहीं होती की मन के चाहने पर मन से कह सके की नहीं आज नशा नहीं करेंगे या आज के बाद मन के खिलाफ जाकर इस या उस बुराई में नहीं पड़ेगे ! अधिकतर ही अनैतिक कर्मे में बुद्धि हार ही जाती है और मन जीत जाता है .. ये मन से हारने वाली बुद्धि किसी भी उम्र में बालिग़ नहीं हो सकते ये नाबालिग हे रहेगी हमेशा ! फिर समाज भी नाबालिगो बौद्धिक विकास के चिन्ता कहा करता है ?
अपने आस पास होती घटनाओ से बच्चा सीखेगा ही !
पड़ा है मैंने की कुछ लोग कहते हैं की मा बाप को बच्चो पर अपनी सोच नहीं थोपनी चाहिए उन्हें छोड़ दे खुद से सीखने के लिए, बड़ी खतरनाक है ये व्यवश्था ! जिसमे अपनी समझ नहीं है वो कही से तो सीखेगा ही आप नहीं सिखाओगे तो फिल्मो से सीखेगा , नेताओ से सीखेगा , अख़बार की खबरों से सीखेगा , टी वी सीरिअल के मसालों से सीखेगा , मोहल्ले वालो से सीखेगा जो जो उसे आकर्षित करेगा उस सब कुछ से सीखेगा पर जो भी सीखेगा वो अव्यवश्थित और खतरे से भरा होगा !

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