शायद
अभी ये उम्मीद करना बेईमानी है की हम कभी ऐसी समझ भी पैदा कर पाएंगे की
अगर पंडित जी की तबियत ख़राब हो तो हम पड़ोस के मौलवी साहब से ही पूजा करवा
लें, अगर मस्जिद बहुत दूर हो और बाइक में पेट्रोल कम , तो पड़ोस के मंदिर
में ही नमाज पढ़ लें ! मंदिर की धर्मशाला के हॉल में निकाह पड़ने की भी आजादी
हो और मदरसे के आँगन में पड़ोस के हिन्दू बच्चे भी आकर खेलें !
फिर भी इतना तो चाहा ही जा सकता है की दोनों तरफ के धार्मिक लोग परस्पर विवाद न करके , मिलकर मानवता के कठिन सवालो का जवाब ढूंढें , जैसे की जो लोग तथाकथिक धार्मिक दंगो में मारे गए, जिनका घर,व्यवसाय सब जला दिया गया उन्होंने इश्वर का क्या बिगाड़ा था , जिन लोगो ने दंगे करवाए और फिर भी बच गए और सत्ता सुख भोग रहे हैं इश्वर की उनपर ये कृपा क्यूं हैं ?
हर धर्म के जानने वाले आगे आएं और मिलकर समझाएं की क्यूं किसी निर्भया को इतना असहनीय दर्द झेलना पड़ा , क्यूं उसका अपराधी सिर्फ तीन साल की सजा काट कर छोड़ दिया जाएगा, क्यूं केदारनाथ में धर्म की तलाश में गए लोगो को मौत मिली आदि-आदि ....,
जरूरत है की हम विचारो के मेलजोल से धर्मों को समृद्ध करें ! वरना दंगो में सिर्फ लोग ही नहीं मरते धर्म भी मरता है !
फिर भी इतना तो चाहा ही जा सकता है की दोनों तरफ के धार्मिक लोग परस्पर विवाद न करके , मिलकर मानवता के कठिन सवालो का जवाब ढूंढें , जैसे की जो लोग तथाकथिक धार्मिक दंगो में मारे गए, जिनका घर,व्यवसाय सब जला दिया गया उन्होंने इश्वर का क्या बिगाड़ा था , जिन लोगो ने दंगे करवाए और फिर भी बच गए और सत्ता सुख भोग रहे हैं इश्वर की उनपर ये कृपा क्यूं हैं ?
हर धर्म के जानने वाले आगे आएं और मिलकर समझाएं की क्यूं किसी निर्भया को इतना असहनीय दर्द झेलना पड़ा , क्यूं उसका अपराधी सिर्फ तीन साल की सजा काट कर छोड़ दिया जाएगा, क्यूं केदारनाथ में धर्म की तलाश में गए लोगो को मौत मिली आदि-आदि ....,
जरूरत है की हम विचारो के मेलजोल से धर्मों को समृद्ध करें ! वरना दंगो में सिर्फ लोग ही नहीं मरते धर्म भी मरता है !
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